बच्चे बन रहे हैं खबरिया, संगवारी संग

सोनम मिश्रा
नेमो रायपुर ब्यूरो

सरगुजा जिले में संगवारी खबरिया प्रोजेक्ट के माध्यम से स्कूल छोड़ देने वाले आदिवासी बच्चों को पत्रकारिता सिखाई जा रही है. ये बच्चे ना केवल गाँव गाँव में घूम कर लोगों को सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक बना रहे हैं बल्कि इनकी आँखों में सुनहरे भविष्य के सपने भी तैरने लगे हैं.

इस पहल में संगवारी खबरिया के माध्यम से बच्चों को पत्रकारिता के गुण सिखाए जा रहे हैं और इस कार्यक्रम का संचालन (एम एस एस वी पी) मानव संसाधन विकास परिषद, हैदराबाद विश्वविद्यालय और यूनिसेफ के संयोजन से संगवारी खबरिया का क्रियान्वयन किया जा रहा है.

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य स्कूल छोड़ चुके बच्चों में आत्मविश्वास का विकास करना, स्थानीय समस्याओं का निराकरण करना और बच्चों में एक उम्मीद की नई किरण लाना है.

प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर श्रुति अपसिंगकर कहती हैं कि संगवारी खबरिया सरगुजा के मैंनपाट ,बतौली, उदयपुर, सरगुजा विकासखण्ड के सभी गांव के लिए क्रियान्वित किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 14 साल से 20 साल तक की उम्र वालों को एडिटिंग, फोटोग्राफी, रिपोर्टिंग सब प्रशिक्षण दिया जाता है.

संगवारी खबरिया का क्रियान्वयन इन दिनों एमएसएसवीपी और यूनिसेफ के माध्यम से किया जा रहा है बच्चों के टेक्निकल सपोर्ट के लिए यूनिसेफ मदद करता है और मानव संसाधन संस्कृति विकास परिषद द्वारा बच्चों को वीडियो बनाना पत्रकारिता के गुण के बारे में अन्य जानकारियां उपलब्ध कराई जाती है.

इस प्रोजेक्ट के माध्यम से लगभग 150 से अधिक लोग निशुल्क ट्रेनिंग कर चुके हैं और इनमें से तो अब बहुत सारे बच्चे खुद से वीडियो बनाकर यूट्यूब मे धमाल मचा रहे है.

खबरिया की ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्राध्यापक लेक्चर देने आते हैं.
इन बच्चों की हर हफ्ते प्रशिक्षण होता है और इन बच्चों का भविष्य सुधारने के लिए इन्हें ओपन स्कूल से परीक्षा भी दिलवाई जा रही है ताकि पत्रकारिता में इनका और अधिक ज्ञान बढ़े.

उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट का उद्देश्य किशोर किशोरी के माध्यम से व्यक्तित्व निखारना, विकास संबधी समस्याओं का बाहर लाना और उसका निदान करना है.

2014 में शुरू हुए संगवारी खबरिया का प्रभाव इतना बढ़ रहा है कि इस प्रोजेक्ट से निकले बच्चो को देखकर ग्रामीण क्षेत्रो से छोटे छोटे बच्चे भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की बात करने लगे है.

वर्तमान में संगवारी टीम के माध्यम से बच्चे सामाजिक मुद्दे पर फिल्म बना रहे हैं. फ़िल्म के माध्यम से से आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता आ रही है और इसके प्रति उत्साह भी बढ़ रहा है.

ये बच्चे सामजिक मुद्दों जैसे बाल विवाह, कुपोषण,हाथियों के उत्पात, महिला उत्पीड़न, स्कूल की मूलभूत सुविधाओं जैसे विषयों पर वीडियो बनाकर यूट्यूब में अपलोड करते है. इन बच्चों को अब हजारों लाइक्स और यूट्यूब सब्सक्राइब भी मिलने लग गए हैं.

इस प्रोजेक्ट में ऐसे बच्चे भी जुड़े है जिन्होंने गाँव के बाहर कदम भी नही रखा था. इन्हें जब अम्बिकापुर आने की जानकरी मिली तो खुश हो गए. बच्चो में उत्साह से सबसे पहले ट्रेन देेखने की बात कही. आप समझ सकते हैं कि इन बच्चो के लिए ट्रैन देखना भी एक कौतुहल का विषय रहा.

इस प्रोजेक्ट में प्रशिक्षण लेने वाले दिनेश कहते है जब से संस्था प्रोजेक्ट चला रही है तब से जुड़ा हूँ और नियमित आता हूं. वे कहते हैं कि मैं जानता हूं कि मुझे जर्नलिज्म करना है इसलिए क्लास में पूरे अनुशासन से आता हूँ. दिनेश और उनके साथियों ने ‘कर्ष आफ द मानसून’ शार्ट वीडियो बनाई है और इस प्रयास के लिए इन्हें द्वितीय स्थान भी प्राप्त हुआ है.

यहीं पढ़ने वाली अंजलि बताती है कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर एक छोटी सी फिल्म बनाकर लोगों को जागरूक करना है. फ़िल्म के बेहतर प्रदर्शन के लिए अंजली को द्वितीय स्थान और 10000 की राशि प्राप्त हुई है.अंजली भले ही एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखती है लेकिन हमेशा अच्छा करने की इच्छा रखती हैऔर गांव में खबरिया बनकर घूमती रहती है.

श्रुति कहती हैं कि ई प्रोजेक्ट के माध्यम से बच्चो को समाज के प्रति संवेदनशील बनाना और बच्चो के अधिकार से रूबरू कराना ही उनका उद्देश्य है.

संगवारी खबरिया की यह मुहीम पूरी तरह कामयाब होगी और यह प्रोजेक्ट अपने मकसद को कामयाब बनाने में पूरी तरह सफल होगा, न्यूज़ मोर्चा यह उम्मीद करता है.

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