वर्ष 2018 में रियल्टी क्षेत्र बेहतर रहने की उम्मीद

रियल्टी बाजार में पिछले कई साल से जारी सुस्ती 2017 में भी जारी रही. रियल्टी क्षेत्र को साल के दौरान तीन झटके नोटबंदी, रेरा और जी.एस.टी. से जूझना पड़ा है, जिससे फ्लैटों की बिक्री प्रभावित हुई और साथ ही नई परियोजनाओं की पेशकश ठहरी रही.

हालांकि, रियल्टी क्षेत्र की कंपनियां 2018 के बेहतर रहने की उम्मीद कर रही हैं. उन्हें उम्मीद है कि सस्ते मकानों और अन्य रियायतों से रियल्टी क्षेत्र आगे बढ़ सकेगा. सस्ते मकानों के क्षेत्र को बुनियादी ढांचा का दर्जा मिल चुका है. रियल एस्टेट डेवलपर्स और परामर्शकों को उम्मीद है कि घरों की बिक्री सुधरेगी. हालांकि, यह सुधार धीरे-धीरे ही होगा. इसकी वजह है कि कीमतें अब स्थिर हो चुकी हैं और आवास ऋण पर ब्याज दरें नीचे आ चुकी हैं.

नोटबंदी-GST से मार्कीट को झटका

वर्ष 2018 में आपूर्ति सीमित रहने की संभावना है. ऐसे में घरों की मांग और बिक्री बढ़ने से बिक नहीं पाया स्टॉक निकल सकेगा. फिलहाल करीब 5-6 लाख इकाइयां बिक नहीं पाई हैं. वर्ष 2017 में घरों की बिक्री और नई पेशकश में गिरावट आई.

रियल एस्टेट कंपनियां इसके लिए तीन वजह नवंबर, 2016 में नोटबंदी और जुलाई से लागू हुए माल एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) के अलावा नए बने कानून रेरा को जिम्मेदार ठहरा रही हैं. एनरॉक प्रापर्टी कंसल्टेंट्स के अनुसार जनवरी-सितंबर, 2017 के दौरान सात प्रमुख शहरों में घरों की बिक्री में जहां 30 प्रतिशत की गिरावट आई वहीं नए परियोजनाओं की पेशकश इससे पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 50 प्रतिशत घट गईं.

बिक्री में गिरावट के बावजूद जनवरी-सितंबर रियल एस्टेट क्षेत्र में निजी इक्विटी निवेश 35,190 करोड़ रुपये रहा. इससे पिछले पूरे साल में यह 36,590 करोड़ रुपए रहा था. हालांकि विशेषरूप से दिल्ली-एनसीआर के घर के खरीदारों को यह साल काफी दिक्कतें झेलनी पड़ीं. जेपी इन्फ्राटेक और आम्रपाली समूह जहां दिवालिया हो गया वहीं यूनिटेक भी परियोजनाओं में देरी को लेकर चर्चा में रही. इसके प्रवर्तकों को जेल भी जाना पड़ा. दिल्ली-एनसीआर में हजारों खरीदारों को अभी तक आवंटन नहीं मिल पाया है

रेरा ने जगाई खरीदारों में उम्मीद की किरण

नए रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) कानून (रेरा) से खरीदारों को जरूर उम्मीद बंधी है. यह कानून उद्योग से उन परिचालकों को बाहर करेगा जो सिर्फ पैसा कमाने के लिए आए हैं और जो भरोसेमंद नहीं हैं.

आवास क्षेत्र की तुलना में वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र का प्रदर्शन साल के दौरान कुछ बेहतर रहा. नए आपूर्ति घटने तथा कुछ देशों की संरक्षणवादी नीतियों की वजह से कार्यालय स्थल को पट्टे पर देने के कार्य में हालांकि सात फीसद की गिरावट आई, लेकिन आवास क्षेत्र की तुलना में इसका प्रदर्शन बेहतर रहा.

 

साभार- पंजाब केसरी

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