बेटी की कमजोरी को ताकत बनाया संगीता धुरंधर ने

सोनम मिश्रा
रायपुर नेमो ब्यूरो

पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर निवासी संगीता धुरंधर 19 वर्षीय दिव्यांग सृष्टि धुरंधर की मां है और स्पेशल एजुकेटर भी हैं. उन्होंने कभी नही सोचा था कि वो कभी इस विशेष क्षेत्र में आएंगी. लेकिन जब उपनाम में धुरंधर शब्द जुड़ा हो तो उसे सार्थक तो होना ही था.

इन्होंने अपनी बेटी की कमजोरी और जरूरत को अपनी ताकत बनाया. इनकी बेटी सृष्टि दिव्यांग है और उसे सबल बनाने के लिए उन्होंने जो संघर्ष किया उसकी अपनी एक अलग ही कहानी है.

उन्होंने यह पूरी कहानी न्यूज़ मोर्चा से साझा की. उन्होंने बताया कि उनकी शादी 1995 में हुई और शादी के कुछ सालो बाद सृष्टि का जन्म हुआ. सृष्टि की असामान्यता का पता तब चला जब वो महज डेढ़ वर्ष की थी.

डॉक्टर ने बताया कि वो सामान्य बच्चो से अलग है और उसकी मानसिक आयु शारीरिक आयु से काफी कम है. संगीता जी के लिए ये सब सुनना आसान नही था. वे उस समय प्रकृति के इस मजाक से कितना आहत हुईं, वे ही जानती हैं.

वे बताती हैं कि शुरू में इन्होंने कुछ दिन होमियोपैथी इलाज कराया लेकिन इससे कुछ फायदा नहीं हुआ. सृष्टि की मानसिक दिव्यांगता की वजह से उसका सोना, खाना, खेलना सब कुछ अव्यवस्थित था. उन्होंने कई साल रात-रात जागकर सृष्टि का ख्याल रखा. बेटी के प्रति उनके प्यार ने तय किया कि उनकी बेटी अगर बाकी बच्चो जैसी नही है तो क्या हुआ. वे इसे जीवन जीना सिखाएंगी और तब उन्होंने तय किया कि अपनी बच्ची के कमजोरी को ताकत में तब्दील करेंगी.

और इसी सोच के साथ वे आगे बढ़ी और 2013 में स्पेशल एजुकेशन का कोर्स किया. उन्होंने अपनी बेटी को पहले बेसिक बैठने, खाने, टॉयलेट जाने और कई छोटे छोटे दैनंदिन कामों की ट्रेनिंग दी. और धीरे धीरे सृष्टि ने सब सीख लिया.

बस यहीं से उन्हें प्रेरणा मिली स्पेशल स्कूल खोलने के लिए. उन्होंने सोचा कि उन्होंने जो सीखा है उसका फायदा वो उन सभी तक पहुंचाएंगी जो इन व्यथाओं से जूझ रहे हैं.

उन्होंने अपने घर में ही सृष्टि स्पेशल स्कूल खोला है जिसमें वे मानसिक दिव्यांग बच्चों को स्पेशल एजुकेशन देती है. उन्हें कार्यात्मक कौशल , फिजियोथेरपी, स्पीच थेरेपी और काउंसलिंग करती है ताकि बच्चों में एक सामाजिक कौशल विकसित हो सकें और दैनिक जीवन में उपयोगी कार्य कर सकें.

संगीता जी कहती है कि एक दिन ऐसा भी आए जब वे ज्यादा से ज्यादा दिव्यांग बच्चों की मदद कर पाएं और जो मां बाप इन बच्चों को समस्या की दृष्टि से देखते है उनकी सोच बदल पाएं. वे चाहती हैं कि दिव्यांग बच्चों को ना केवल दैनिक जीवन में आवश्यक कौशल विकसित कर पाएं बल्कि उन्हें वोकेशनल ट्रेनिंग भी दे सकें. वे अपने इरादों में सफल होने के लिए महिला और बाल विकास विभाग से सहयोग प्राप्त करने की लगातार कोशिश कर रही हैं.

न्यूज़ मोर्चा उनके इन प्रयासों में सफलता की कामना करता है और उनके प्रयासों में सरकारी और निजी मदद के लिए सभी से आगे आकर सहयोग देने की अपील करता है.

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