चिट्ठी आई है चिंता के मारे चार रिटायर जजों की

नेमो ब्यूरो

सोशल मीडिया पर लोगों ने जब सुप्रीम कोर्ट के चार माननीय जजों की प्रेस कांफ्रेंस को अवार्ड वापिसी अभियान पार्ट 2 कहा था तो शायद गलत नहीं कहा था.

इसी कड़ी में देश और संविधान की चिंता में घुले जा रहे चार रिटायर्ड जजों की चिट्ठी सामने आई है. इनमे से तीन हाई कोर्ट और एक सुप्रीम कोर्ट में संविधान की सेवा में अपना जीवन अर्पित कर चुके हैं.

यह खुली चिट्ठी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखी है जिसे हम ज्यों का त्यों उनके शब्दों में प्रस्तुत कर रहे हैं.

डियर चीफ़ जस्टिस,

सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न बेंचों को केसों, ख़ासकर संवेदनशील केसों, के आवंटन के तरीके को लेकर एक गंभीर मुद्दा सामने लाए हैं.

उन्होंने गहरी चिंता जताई है कि केस सही तरीके से आवंटित नहीं किए जा रहे हैं और उन्हें मनमाने तरीके से खास बेंचों को दिया जा रहा है, कई बार ये जूनियर जजों की अगुवाई वाली बेंचों को दिए जाते हैं.

इसका न्याय के प्रशासन और कानून के राज पर काफी घातक असर हो रहा है.

हम चार जजों से सहमत हैं कि रोस्टर तय करने का अधिकार भारत के मुख्य न्यायाधीश का है और वो काम के आवंटन के लिए बेंचें तय कर सकते हैं, इसके मायने ये नहीं हैं कि ऐसा मनमाने तरीके से किया जाए मसलन संवेदनशील और अहम केसों को चीफ़ जस्टिस जूनियर जजों की चुनिंदा बेंचों को सौंप दें.

इस मुद्दे का निस्तारण ज़रूरी है और बेंचों के निर्धारण और केसों को सौंपे जाने के लिए स्पष्ट नियम और कायदे तय किए जाने चाहिए, जो तर्कसंगत, निष्पक्ष और पारदर्शी हों.

न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट में लोगों का भरोसा बहाल करने के लिए ऐसा तुरंत किया जाना चाहिए.

हालांकि, ऐसा होने तक ये ज़रूरी है कि सभी संवेदनशील और अहम मामलों को, जिनमें लंबित मामले भी शामिल हैं, इस कोर्ट की पांच वरिष्ठतम जजों वाली संवैधानिक पीठ देखे.

सिर्फ़ ऐसे उपाय ही लोगों को भरोसा दे सकते हैं कि सुप्रीम कोर्ट निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है और रोस्टर के कर्ता के रूप में चीफ़ जस्टिस की शक्तियों का अहम और संवेदनशील मामलों में ख़ास नतीजा हासिल करने के लिए दुरुपयोग नहीं हो रहा है.

इसलिए हम आपसे इस संदर्भ में तुरंत कदम उठाने का अनुरोध करते हैं.

हस्ताक्षरित

जस्टिस पीबी सावंत (रिटायर्ड) पूर्व जज, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया

जस्टिस एपी शाह (रिटायर्ड) पूर्व चीफ जस्टिस, दिल्ली हाई कोर्ट

जस्टिस के चंद्रू (रिटायर्ड) पूर्व जज, मद्रास हाई कोर्ट

जस्टिस एच सुरेश (रिटायर्ड) पूर्व जज, बॉम्बे हाई कोर्ट

हो सकता है बहुत जल्द ही इसकी अगली कड़ी में आपको जिला अदालतों के कुछ जजों के लिखे खत पढ़ने को मिलें जिससे यह तथ्य स्थापित हो जाए कि सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट और सेशन न्यायालय तक ‘हम सब एक हैं’ और संविधान की रक्षा करने के लिए जो बन पड़ेगा, करेंगे फिर चाहे वह राजनीति ही क्यों ना हो.

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