अगर कुछ बड़ा करना चाहते हो तो उसके लायक बनो- मोहन भागवत

कुलभूषण सिंह
नेमो ब्यूरो, रायपुर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत रायपुर के प्रवास पर है. जिसके चलते आज आयोजित बौद्धिक संबोधन में उन्होंने स्वयं सेवकों की विशाल सभा को संबोधित किया. अपने 40 मिनट के लंबे संबोधन में उन्होंने भारत की अखंडता और एकता की बात कही. उन्होंने कहा कि आज भारत के साथ हर कोई व्यापार करना चाहता है क्योंकि वो जानते है कि हम किसी के साथ धोखा नही करते. भारत ने आज तक न कभी किसी देश पर हमला किया न ही हमे किसी को लूटने की जरूरत पड़ी और न ही हम किसी से डरे हैं. हम अपने आप मे ही अखंड रहे हैं, हमने सब का स्वागत किया है, लोग बाहर से आकर हमसे कितना कुछ ले गए पर फिर भी हमे कोई फर्क नही पड़ा. उनका कहना था कि भारत एक दिन दुनिया का सिरमौर बनेगा. इसकी ताकत दुनिया मे सबसे अलग है जिसका लोहा हर कोई मानता है.

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि भारत है तो हम है. हमारी एकता के बीच आने वाली हर चीज कभी भी हमारे सुख का कारण नही बन सकती और इससे हमें दुख ही मिलेगा. उन्होंने भारतीय संस्कृति को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि हमारी संस्कृति दुनिया की किसी भी संस्कृति से बहुत अलग है. हमारी संस्कृति समाज को जोड़े रखने का काम करती है. उन्होंने कहा कि राजनीति और सत्ता कभी भी किसी के हाथ मे नहीं रहती, ये हमेसा बदलते रहती है. आज हर कोई सुख के पीछे भागता है, दुख कोई नही चाहता. आज लोग व्यापार करना चाहते है जिसके लिए वो समूह बनाते हैं. पर व्यापार में स्वार्थ कभी भी हमे साथ जोड़ कर नही रख सकता. साथ ही साथ उन्होंने ये भी कहा कि सक्रांति मतलब परिवर्तन, ऐसा बदलाव जो सबको साथ लेकर चलता है. परिवर्तन कभी भी आसान नही होता. अगर कोई बड़ा काम करना चाहते हो तो पहले उसके लायक बनो.

जिस तरह भगवान ने जानवरो को बड़े नाखून और दांत दिए है ठीक उसी तरह मनुष्य को बुद्धि दी है जिसका इस्तेमाल कर वो राजा बन गया है. एक मनुष्य को अपने बुद्धि का इस्तेमाल लोगो जोड़कर उन्हें साथ लेकर चलने में करना चाहिए. उन्होंने कहा आज हम भले ही अपने रिश्ते नाते भूलते जा रहे हैं पर फिर भी हम सब समान पूर्वजो के वंसज हैं. सुख कभी बटोरने में नही मिलता बल्कि बाटने में मिलता है. बाहर की चीज़ों के पीछे भागने से कभी भी सुख नही मिलता. जिस तरह किसी भी देश को किसी न किसी तरह पहचान जाता है उसी तरह हमारे देश की विभिन्नता भी हमारी पहचान है. हमारे देश मे कई धर्म है जो निरंतर बढ़ते जा रहे है. छत्तीसगढ़ के बारे में उन्होंने कहा कि जिस तरह किसी संस्कृति को बढ़ाने के लिए उसकी मूल चीज़ों को आगे लाना होता है उसी प्रकार छत्तीसगढ़ को आगे बढ़ाने के लिए यहाँ के आदिवासियों को आगे लाने की जरूरत है.

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