क्रिप्टो करेंसी की दीवानगी की सवारी करेंगे मुकेश अम्बानी

नेमो बिज़नेस

एक तरफ क्रिप्टो करेंसी के प्रति लोगों की दीवानगी दिनों दिन बढ़ रही है और दूसरी और पूरी दुनिया की सरकार लोगों को चेतावनी दे रही हैं कि ये बिज़नेस पोंजी स्कीम है.

यानी एक तरफ डिमांड है और दूसरी तरफ इसकी सप्लाई करने वाले की विश्वसनीयता पर सभी को शक है. इसके बीच में जो जगह बचती है वह है बड़े बिज़नेस की सम्भावना और मुकेश अम्बानी का दिमाग.

खबर के मुताबिक, रिलायंस जियो इन्फोकॉम खुद की क्रिप्टोकरंसी जियो कॉइन लाने की योजना पर काम कर रहा है. बिज़नेस न्यूजपेपर मिंट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 50 सदस्यों का एक दल ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी पर काम कर रहा है. यह टीम मुकेश के बड़े बेटे आकाश अंबानी की देखरेख में काम कर रही है.

यह रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब साउथ कोरिया में क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंजों और इन्हें मान्यता देनेवाले बैंकों पर सरकार की कठोर कार्रवाई करने के बाद दुनियाभर में बिटकॉइन की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. दक्षिण कोरिया में क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंजों पर ताले जड़ने की तैयारी से क्रिप्टोकरंसी की दुनिया में मांग का सबसे बड़ा स्रोत सूख जाने का डर है. गौरतलब है कि दुनियाभर में क्रिप्टोकरंसी की खपत में अकेले 20 प्रतिशत हिस्सा दक्षिण कोरिया का है.

ब्लूमबर्ग के जुटाए आंकड़ों के मुताबिक, बिटकॉइन की कीमत 12 प्रतिशत गिरकर 12,801 डॉलर पर आ गई. बाद में 6 प्रतिशत तक सुधार आया. वहीं, रिपल 14 प्रतिशत जबकि इथेरियम 4 प्रतिशत टूट गई. दरअसल, दुनियाभर की सरकारें डिजिटल करेंसीज के बढ़ते दाम से लोगों में इसके प्रति बढ़ती दीवानगी से चौकन्ना हो गई हैं. लोगों से लेकर वॉल स्ट्रीट बैंक्स तक क्रिप्टोकरंसीज की तरफ खींचे आ रहे हैं.

भारत में भी वित्त मंत्री अरुण जेटली और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने भी चेतावनी दे दी है कि लोग बिटकॉइन का लेनदेन अपने रिस्क पर करें. सरकार का कहना है कि देश में बिटकॉइन समेत कोई भी क्रिप्टोकरंसी मान्य मुद्रा नहीं है.वहीं, रिजर्व बैंक ने कई बार कहा कि क्रिप्टोकरंसी बनाना, इसकी ट्रेडिंग करना या पेमेंट में इसका इस्तेमाल करना किसी केंद्रीय बैंक या मौद्रिक प्राधिकरण की ओर से अधिकृत नहीं है. वित्त मंत्रालय ने बिटकॉइन ट्रेडिंग को पोंजी स्कीम जैसा बता दिया.

बहरहाल, जियो ने डिजिटल करंसी बनाने से जुड़ी खबरों को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी का फायदा उठाने की अंबानी की योजना अभी आरंभिक चरण में है.

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