मसूड़ों से जुडी बिमारी है ‘जिंजिवाइटिस’

जिंजिवाइटिस मसूड़े की सूजन के लिए प्रयोग की जाने वाली मेडिकल टर्म है. यह एक पेरिओडोंटल रोग है. पेरिओडोंटल रोग में उन ऊतकों / टिशु, में सूजन और संक्रमण हो जाता है जो की दांत को सपोर्ट करते हैं. यह ऊतक पेरिओडेंटल लिगामेंट, टूथ सोकेट या गम हो सकते है. जिंजिवाइटिस के लक्षणों में शामिल है मसूड़ों से खून आना, मसूड़ों का सूज जाना-फूल जाना, दर्द होना, मुंह में छाले हो जाना आदि. जिंजिवाइटिस के लिए कीटाणु जिम्मेदार होते हैं जो लार में पैदा होते और बढते हैं. जब कोई संक्रमित व्यक्ति किसी स्वस्थज व्यक्ति के साथ किसी प्रकार का खाना बांटता है तब लार के माध्यम से बैक्टीरिया स्वस्थ आदमी के अंदर प्रवेश करते हैं.

जिंजिवाइटिस किसिंग के द्वारा भी एक स्वस्थ व्यक्ति में प्रवेश कर सकता है. कुछ मामलों में कीटाणु दूसरे आदमी से हस्तांतरित हो सकते हैं, लेकिन यह इस बीमारी का मुख्य लक्षण नहीं है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आदमी की प्रतिरक्षा प्रणाली इन बैक्टीरिया को समाप्त कर देती है. जिंजिवाइटिस की समस्या किसी आदमी के शरीर की रक्षा तंत्र प्रणाली पर निर्भर करती है और यह भी वह कितनी बार संक्रमित लार के संपर्क में आया है.

मुंह की उचित तरीके से देखभाल करके जिंजिवाइटिस से बचाव किया जा सकता है. खाने के बाद नियमित रूप से ब्रश करने से मसूडे की सूजन से बचा जा सकता है. धूम्रपान करने वालों में धूम्रपान न करने वालों की तुलना में जिंजिवाइटिस होने का खतरा ज्यादा होता है. यदि जिंजिवाइटिस के कीटाणु धूम्रपान करने वालों में प्रवेश करते हैं तो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली इस बीमारी को बढने से नहीं रोकती है. तो उनके लिए, यह ज्यादा संक्रामक बीमारी है.

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जिंजिवाइटिस मसूडों के आसपास के ऊतकों और कोशिकाओं के मरने के कारण होता है. यह मसूडों में पहले प्लेक (मसूडों में मैल जमना) को उजागर करता है जो कि मसूडों को कमजोर और काला बनाते हैं और इसके कारण दांत गिर जाते हैं. जिंजिवाइटिस मसूडों की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है जिससे मसूडों की संवेदनशीलता बढ जाती है और दातों में संक्रमण बढते हैं.

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जिंजिवाइटिस संक्रामक रोग है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि यदि कोई संक्रमित व्यक्ति को एक बार चूमे तो यह संक्रमण आदमी में प्रवेश करेगा. संक्रमण फैलने का खतरा व्यक्ति के स्वास्य्ी म पर निभर्र करता है. यदि आदमी की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत है तब यह संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है. लेकिन जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है उनमें यह संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है. कभी-कभी यह संक्रमण आदमी में अपने-आप हो जाता है. जिसका मतलब यह है कि आदमी खुद इस संक्रमण से प्रभावित नहीं है लेकिन बैक्टीरिया के फैलने का कारण बनता है.

मुंह की उचित तरीके से साफ सफाई रखकर जिंजिवाइटिस के खतरे से बचा जा सकता है. दांतों का नियमित चेकअप कराकर इस संक्रमण से बचा जा सकता है. किसी दूसरे से खाना बांटने और किसिंग के बाद दांतों की उचित तरीके से सफाई और ब्रश करने से कोई भी इस संक्रमण के फैलने की संभावना को कम कर सकता है. यदि मसूडों में संक्रमण के कोई लक्षण दिखाई दें, जैसे – मसूडों से खून बहना या मसूडों में दर्द होना, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कीजिए. दांतों की तुरंत देखभाल करके इस संक्रमण को प्रारंभिक स्टेज में ही रोका जा सकता है.

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