ड्राई आई की समस्‍या से छुटकारा पाने के लिए आसान टिप्स

आंखे अनमोल हैं, लेकिन बदलती जीवनशैली और बढ़ते प्रदूषण के चलते आजकल ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है. जब किसी व्यक्ति की आँखों में आंसू नहीं आते तो ऐसी स्थिति को ड्राई आईज़ (सूखी आँखें) कहा जाता है क्योंकि ये आंसू आँखों को नमी और पोषण प्रदान करते हैं. इसके लक्षणों में आँखों में खुजली, खुरदुरापन और गालों तक आंसू आना शामिल हैं.

दफ्तर में कम्प्यूटर के सामने लगातार घंटों बैठकर काम करना आंखों को कतई रास नहीं आता. इससे उनकी सेहत को काफी नुकसान पहुंचता है. इसलिए दफ्तर में आंखों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. दिन के अंत में आपकी आँखें थकान महसूस करती हैं, धुएं से जलती हैं तथा हवा के कारण आँखों में मवाद भी आता है. यदि आँखों की शुष्कता का इलाज नहीं किया गया तो आपकी आँखों में अल्सर हो सकता है, कॉर्निया में जख्म हो सकता है या आँखों में गंभीर संक्रमण हो सकता है.

ड्राई आईज के अन्य कारणों में कॉन्टेक्ट लेंस पहनना, लासिक सर्जरी होना जिसमें नसों को काट दिया जाता है तथा इससे पलक झपकाने की दर भी कम हो जाती है तथा कुछ दवाईयों जैसे एलर्जी की दवाई का सेवन, गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन आदि शामिल है.

यदि आप प्री मेनोपॉज के दौर से गुजर रही हैं तो भी ड्राई आईज की समस्या हो सकती है क्योंकि यह वह समय होता है जब शरीर के हार्मोन्स में परिवर्तन होता है. शोध से पता चला है कि ड्राई आईज और हार्मोंस के असंतुलन के बीच एक विशेष संबंध है.

आँखों में होने वाले संक्रमण के कारण हल्की जलन होती है. इस जलन के कारण किसी भी प्रकार के लुब्रिकेंट्स आँखों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं जिसमें आँखों में पाया जाने वाला द्रव्य भी शामिल है. अत: आँखों में किसी भी प्रकार का संक्रमण न होने दें.

यदि आप आँखों की शुष्कता की समस्या से परेशान हैं तो आपको विशेष उपचार करने चाहिए. प्री मेनोपॉज के कारण होने वाली आँखों की शुष्कता के लिए कृत्रिम आंसू भी एक उपचार है. आपको ऐसी डाइट खानी चाहिये जिसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड पाए जाते हैं.

चिकित्सकों से अनुसार आंखों में कोई समस्या हो या न हो लेकिन फिर भी समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए. साथ ही लगातार टीवी देखने या कम्प्यूटर पर काम करने से भी बचना चाहिए. इससे आंखों पर काफी दबाव पड़ता है और आंखें कमजोर होती हैं. इसके अलावा काम के बीच-बीच में पलकों को भी झपकाते रहना चाहिए. पलकों को झपकाने से आंख की पुतली के ऊपर आंसू फैलते हैं, जिससे उनमें नमी बनी रहती है और वे सूखेपन से बच जाती हैं.

साथ ही अगर घर से बाहर निकलते समय अच्छी क्वॉलिटी का चश्मा पहनकर निकलें. इससे आप धूल, धूप और हवा आदि से बचे रहेंगे. साथ ही थोड़ी-थोड़ी देर पर आंखों में ताज़े पानी के छीटे भी मारते रहें. इससे आंखों को आराम मिलता है. हां, खाने में हरी साग-सब्जियां, मौसमी फल और दूध आदि को शामिल करें. इससे आंखों में होने वाली तमाम तरह की समस्याओं से छुटकारा मिलता है. साथ ही आंखों की रोशनी बढ़ती है.

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