धान का कटोरा की ठेठरी खुरमी है खास, चलो चख लें

सोनम मिश्रा
रायपुर नेमो ब्यूरो

होली के त्योहार छत्तीसगढ़ में व्यंजन खास महत्व रखता है. इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रचे-बसे ठेठरी, खुरमी, मुठिया, गुझिया, मालपुआ, गुलगुला, बबरा जैसे विभिन्न प्रकार के व्यंजन दो दिन पहले से ही बनना शुरू हो जाते हैं. होली की खास डिश छत्तीसगढ़ की महिलाओ के रसोई की खास जिम्मेदारी होती है. होली के शुभ अवसर पर पड़ोस की महिलाएं इसमें एक-दूसरे को सहयोग परस्पर करती हैं.

अगर आप भी इस होली में छत्तीसगढ़ आये हुए हैं तो इन व्यंजनों को चखे बिना मत जाईयेगा.

छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की देशभर अलग पहचान


धान का कटोरा कहे जाने वाला छत्तीसगढ़ में ज्यादातर व्यंजन चावल से ही बनाए जाते हैं.चावल से बनाये जाने वाले इस सुंदर व्यंजन की तो बात ही कुछ और है. इसकी खुशबू आपको राजधानी के घरों में भी मिल जाएगी.

त्योहारों में पकवान का बनना हर घर की जरूरत होती है. पकवान के बारे में पूछने पर गुढ़ियारी की निवासी कंचन साहू ने बताया कि होली के दो दिन पहले ही लड्डू, गुझिया, मिठाई सहित छत्तीसगढ़ी पकवान ठेठरी, खुरमी, पपची, बिड़िया बनाना शुरू कर देते है. आसपास की महिलाये भी कई बार एक दूसरे के घर मदद कर देती है. घरों की महिलाएं मिलकर व्यंजन तैयार करती हैं.

छत्तीसगढ़ी व्यंजन का घर-घर मे बड़ी डिमांड है. पकवान त्योहार के दिन घर आने वाले मेहमानों व रिश्तेदारों को परोसे जाते हैं. मीठे में गुलगुला की विधि बहुत आसान गढ़ कलेवा संचालिक सरिता शर्मा के मुताबिक गुझिया, मालपुआ चर्चित व्यंजन हैं.

छत्तीसगढ़ के मीठे व्यंजन में गुलगुला प्रमुख स्थान रखता है. इसे मीठे व्यंजन के रूप में परोसा जाता है. गुलगुला बनाने के लिए गेहूं के आटे में गुड़ घोल कर छोटी छोटी गोलियां बनाई जाती है, जिन्हें तेल या घी में पकौड़े की तरह तला जाता है. इस तरह इसे बनाने की विधि बहुत ही आसान है और लोगो को खूब भाता भी है.

खुरमी भी होली का खास व्यंजन है. गढ कलेवा में 36 पारंपरिक व्यंजन राजधानी स्थित गढ़कलेवा में प्रदेश के प्रमुख पारंपरिक व्यंजनों न्यूनतम दर पर लोगों को उपलब्ध कराने के साथ विलुप्त होने से बचाया जा रहा है. यहां ठेठरी, खुरमी, चीला, मुठिया, अंगाकर रोटी, बफौरी, चौसेला जैसे 36 तरह के पारंपरिक व्यंजन खाने में बड़े लजीज होते है.

मीठे व्यंजनों में बबरा, देहरउरी, मालपुआ, दूधफरा, अइरसा, ठेठरी, खुरमी, बिड़यिा, पिडिया, पपची, पूरन लाड़ू, करी लाड़ू, बूंदी लाड़ू, मुर्रा लाड़ू, खाजा, कोचई पपची आदि परोसे जाते हैं. इन व्यंजनों की मांग दीवाली, होली, तीज, पोला आदि त्योहार के मौके पर बनते ही है.

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