रायपुर के कीर्ति मुकुट में आई जी के वी ने लगाया एक और मोरपंख

सोनम मिश्रा
नेमो रायपुर ब्यूरो

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कीर्ति मुकुट में एक और मोरपंख जुड़ गया है. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के लिए यह गर्व की बात है कि प्रबंध सूचना प्रणाली के माध्यम से आॅनलाईन एकीकृत भुगतान सुविधा के विकास के लिए प्रतिष्ठित स्काॅच सम्मान से नवाजा गया है.

नई दिल्ली के काॅन्सटिट्यूशन क्लब में शनिवार 10 मार्च 2018 को आयोजित सम्मान समारोह में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील ने स्काॅच ग्रुप के अध्यक्ष समीर कोचर से यह सम्मान प्राप्त किया. विश्वविद्यालय के लिए यह गर्व की बात है कि उसे यह अवसर प्राप्त हुआ है.

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रबंध सूचना प्रणाली के नोडल अधिकारी डाॅ. रवि सक्सेना तथा एन.आई.सी. के वैज्ञानिक अभीजित कौशिक भी उपस्थित थे. यह सम्मान इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में प्रबंध सूचना प्रणाली के माध्यम से समस्त वित्तीय लेन-देन के लिए आॅनलाईन सुविधा विकसित किये जाने हेतु नेशनल पेमेन्ट काॅरपोरेशन आॅफ इंडिया तथा स्काॅच ग्रुप की ओर से दिया गया.

गौरतलब है कि स्काॅच ग्रुप देश का एक प्रतिष्ठित वैचारिक समूह है जो वर्ष 1997 से समावेशी विकास के संबंधित सामाजिक-आर्थिक मुददों पर कार्य कर रहा है. स्काॅच ग्रुप द्वारा प्रशासन, वित्त, प्रौद्योगिकी, आर्थिकी एवं सामाजिक क्षेत्रों में देश से स्वतंत्र उच्चतम नागरिक सम्मान स्थापित किये गए हैं जिनमें चैलेंजर अवार्ड, एचीवर अवार्ड, सी. रंगराजन अवार्ड, स्मार्ट गवर्नेन्स अवार्ड, रेनांसा अवार्ड आदि विशेष हैं.

विश्वविद्यालय को स्काॅच अवार्ड मानवीय उत्कृष्टता एवं भारतीय समाज में आर्थिक-सामाजिक परिवर्तन के लिए दिया गया. नेशनल पेमेन्ट काॅरपोरेशन आॅफ इंडिया भारतीय रिजर्व बैंक तथा भारतीय बैंक एसोसिएशन का संयुक्त उपक्रम है जो देश में रिटेल भुगतान एवं उनके सेटलमेन्ट हेतु गठित किया गया है. इसका प्रमुख उद्देश्य रिटेल भुगतान तंत्र में प्रौद्योगिकी के उपयोग के द्वारा दक्षता विकास कर कैशलेस समाज का निर्माण करना है. एन.पी.सी.आई. द्वारा डिजिटल करेन्सी ‘‘रूपे कार्ड’’ एवं आॅनलाईन डिजिटल पेमेन्ट एप ‘‘भीम’’ विकसित किये गए हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में प्रबंध सूचना प्रणाली (एम.आई.एस.) के माध्यम से फीस, वेतन, मजदूरी, छात्रवृत्ति आदि का पूर्णतः आॅनलाईन लेन-देन किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2018-19 में विश्वविद्यालय का शत-प्रतिशत वित्तीय लेन-देन कैशलेस हो जाने की उम्मीद है.

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