भूखों को देगी रोटी, ‘रोटी बैंक’…

रायपुर

राजधानी के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी अस्पताल कैंपस में कई ऐसे लोग होते हैं जो गांवों से आते हैं और होटलों में खाने लायक पैसे नहीं होते। इसकी वजह से उन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती। ऐसे मजबूर, लाचार लोगों को रोटी खिलाने का जिम्मा ‘इंडियन रोटी बैंक’ ने उठाया है। समाजसेवी संस्था के सेवादार घर-घर से एकत्रित की गई रोटियों को अचार, प्याज, गुड़, चटनी के साथ अच्छे ढंग से पैक करके जरूरतमंदों को बांटेंगे। संस्था का लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। बुधवार को रोटी बैंक का शुभारंभ हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई चारों धर्मों के प्रतिनिधियों ने फीता काटकर किया। इस मौके पर महापौर प्रमोद दुबे ने संस्था के सदस्यों की प्रशंसा की करते हुए कहा कि इस अभियान से औरों को भी प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने हर शहर, हर गांव तक इस अभियान की अलख जगाने के लिए आम लोगों से निवेदन किया।

लोग रोटी लाते गए, महिलाएं पैक करती रहीं और फिर सेवादारों ने बांटा

मरीन ड्राइव पर सैकड़ों लोगों ने अपने घर की बची रोटियां लाकर रोटी बैंक के सदस्यों को दी। देखते ही देखते दो हजार से भी ज्यादा रोटियां जमा हो गईं। इन रोटियों को संस्था से जुड़े सेवादारों ने सिल्वर रंग के कागज में पैक किया। एक पैकेट में चार रोटियों के साथ अचार, चटनी और गुड़ को पैक किया गया। शुभारंभ के पहले ही दिन पांच सौ से ज्यादा पैकेट तैयार कर लिए गए। पैकेट तैयार हो जाने के बाद संस्था के 15 से ज्यादा सेवादारों को 50-50 पैकेट थैले में भरकर दिया गया। सेवादारों ने मरीन ड्राइव, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल सहित अन्य जगहों पर उन पैकेट को जरूरतमंदों को वितरित किया। रिक्शा चालक, ठेले वाले, मजदूरों के अलावा रेलवे स्टेशन पर बाहर से आने वाले अनेक यात्रियों ने भी खुशी-खुशी पैकेट लिया। छत्तीसगढ़ कोआर्डिनेटर सर्वजीत सिंह, दुष्यंत सिंह, तोशेष साहू, शुभम सिंह सहित अनेक सेवादार मरीन ड्राइव पर लाई गई रोटियां अलग-अलग करके छांटते दिखाई दिए और फिर महिलाएं पैक करने में जुटी नजर आईं।

प्रत्येक रविवार को बांटेंगे रोटी के पैकेट

इंडियन रोटी बैंक के संस्थापक विक्रम पांडेय ने बताया कि रोटी बैंक का उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। इसके लिए हमें ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत भी नहीं है। बस, लोग अपने घर में बची हुई रोटियां लाकर हमें दे दें। हम उन रोटियों को जरूरतमंदों तक पहुंचाएंगे। अभी यह सुविधा प्रत्येक रविवार को उपलब्ध कराई जा रही है। सेवादार अपनी इच्छा से दो-चार घंटे का समय निकालकर सेवा दे रहे हैं। भविष्य में यह सुविधा प्रतिदिन शुरू की जाएगी।

साभार- नईदुनिया.जागरण.कॉम

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