ऐसे उठाया सारबहरा की सरपंच ने स्वच्छता का बीड़ा

सोनम मिश्रा
नेमो रायपुर ब्यूरो

सारबहरा गाँव में चारों तरफ स्वच्छता का काम तेजी से चल रहा है, चारों तरफ स्वच्छता को लेकर जागरूकता भी तेजी से फ़ैल रही है.

और यह सब संभव हुआ है सारबहरा ग्राम पंचायत की सरपंच ऋतु पंडराम के प्रयासों से जिन्होंने इस अभियान को जन जन का अभियान बनाने के लिए कमर कस ली है.

हमारी रायपुर ब्यूरो ने जब उनसे इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि जिला बिलासपुर के गोरेला विकासखंड के अंतर्गत आने वाली इस ग्राम पंचायत के हर घर में शौचालय बन चुके हैं.

वे बताती हैं कि 6000 की आबादी वाले इस गांव में 2000 परिवार हैं. पहले यहां स्वच्छता को लेकर जागरूकता का अभाव था. 2015 में जब वे सरपंच बनी तब उन्होंने ठाना था कि वे अपने गांव को खुले में शौच मुक्त बनाएंगे और लोगों को इसके लिए प्रेरित करेंगी.

यह वह समय था जब गांव में स्वच्छता को लेकर जागरूकता का अभाव था हर मौसम में हैजा जैसी गंभीर बीमारियां फ़ैल जाती थीं और बच्चे कुपोषण के शिकार होते थे.

यह सरपंच स्वच्छ भारत मिशन से शुरू से प्रेरित रही हैं इन्होंने यह तय किया था कि जब वे सरपंच बनेंगी तो गांव में उनका पहला प्रयास स्वच्छता के क्षेत्र में होगा. और उन्होंने यह कर के दिखा भी दिया है.

उन्होंने गांव में मनरेगा और स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनवाये और इस काम मे ग्रामीणों ने उनका खास सहयोग किया. वैसे तो गांव में 976 शौचालय बनवाये जाने थे लेकिन उनकी प्रेरणा ऐसा काम कर गई कि 334 परिवारों ने खुद शौचालय बनवाने की ठान ली.

उन्होंने बताया कि गांव में बुजुर्गों ने सबसे ज्यादा शौचालय बनाने का विरोध किया था. सरपंच और इनकी पंच बॉडी ने मिलकर शौचालय की उपयोगिता के बारे में बताया कि शौचालय में 2 मीटर गहरा सोखता भी बनाया जाएगा जिससे मल दफन किया जा सके.

इसके लिए इन्होने एक नहीं कई प्रयास किये. यहां हर हफ्ते गांव में सफाई अभियान को लेकर रैली निकाली जाती हैं. कोई व्यक्ति खुले में शौच के लिए ना जाए इसके लिए 10-१० के दो दल बनाये गया हैं. ये स्वच्छता दल हैं जो सुबह शाम गश्त करने निकलते हैं.

वहीं कुछ दिन पहले गौरेला ब्लॉक के जनप्रतिनिधियो की सॉलिड वेस्ट मटेरियल पर ट्रेनिंग हुई जिसमे उन्होंने कचरे को सही तरीके से कम्पोस्ट करने का तरीका सीखा.

उन्होंने अपनी पंचायत की जरूरतों के लिए मिलने वाली 13वें, 14वे वित्त और मूलभूत बजट की राशि से 16 लाख 80 हजार का कार्य शौचालय बनवाये हैं और उनके प्रयासों को देखकर प्रति शौचालय 12000 की दर से सरकार ने 60 लाख 24 हजार तक की किश्त पंचायत को दे दी है और बाकी किस्त आने वाले 1 से 2 माह के भीतर सरकार ने पंचायत को देने का आश्वासन दिया है.

गांव में कूड़ा करकट को व्यवस्थित रुप से फेंकने और उस को रिसाइकल कर कैसे उपयोग किया जा सकता है इस दिशा में भी कार्य किये जा रहे हैं.

आने वाले समय में सारबहरा की सरपंच के यह प्रयास दूसरे गाँवों के लिए प्रेरणा देने का काम कर सकती है.

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