तो इसलिए ममता बनर्जी को दर्द होता है अमित शाह के नाम से

राहुल रॉय
नेमो ब्यूरो

हाल ही में दिया गया ममता बनर्जी का यह बयान कि उन्हें शिकायत प्रधानमंत्री मोदी से नहीं, अमित शाह से है, यह सोचने को मजबूर करती है कि आखिर ऐसा क्यूँ है.

इसकी एक वजह तो हाल ही में हुए बंगाल के स्थानीय चुनावों में दिख सकती है जहां भाजपा प्रमुख विपक्षी दल बन चुका है. लेकिन इससे भी बड़ी एक वजह इस खबर में छिपी हुई है.

खबर कहती है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कांग्रेस के शासन वाले मेघालय और मिजोरम के साथ ही वाम मोर्चा की सरकार वाले त्रिपुरा में भगवा दल को मजबूत करने की कोशिशों में जुट गए हैं. चार पूर्वोत्तर राज्यों- नगालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं.

ममता बनर्जी को बखूबी पता है कि मेघालय और मिजोरम की पूरबी हवा आसाम से होकर गली के रास्ते से बंगाल में ही घुसने वाली है. और अगर ऐसा हो गया तो यह पूर्वी हवा पश्चिम बंगाल में उनकी सत्ता को किधर उड़ा के ले जायेगी, कहा नहीं जा सकता है.

यही वो वजह है जिससे ममता बनर्जी को अब मोदी नहीं बल्कि अमित शाह का नाम कांटे की तरह चुभ रहा है.

यहां यह उल्लेख करना भी जरूरी होगा कि बीजेपी ने 2016 में असम के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. इस वर्ष की शुरुआत में मणिपुर में हुए चुनाव में पार्टी ने महागठबंधन तैयार कर सरकार बनाने में सफलता पाई थी.

मेघालय और त्रिपुरा में बीजेपी बूथ लेवल कमेटी मैनेजमेंट और विपक्षी दलों के असंतुष्ट विधायकों को अपने पाले में लाने के जीत दिलाने वाले पुराने फॉर्म्युलों पर काम कर रही है. त्रिपुरा में यह पहले ही तृणमूल कांग्रेस के छह विधायकों को तोड़ने में कामयाब रही है और राज्य में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरी है. त्रिपुरा में पिछले 24 वर्षों से वाम मोर्चा की सरकार है.

जो भी हो, यह तो साफ़ है कि भाजपा के झंडे जल्द ही पूरब में भी लहराने वाले हैं और देखना यह है कि इस लहर में ममता कब तक अपने हाथ पैर चला पाती हैं.

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